वक्त-वक्त की बात
मै देवनारायण साहू अपने काम काे गंभीरता से लेता हू और किसी भी काम काे लगन से करना मेरा पेशा है । हमारा एक दुकान है वह दिनेश प्रिंटर्स नाम से रायपुर में है । न्यू थिंक नाम से ब्लाग है ।
छत्तीसगढ़ी गीत
मै देवनारायण साहू अपने काम काे गंभीरता से लेता हू और किसी भी काम काे लगन से करना मेरा पेशा है । हमारा एक दुकान है वह दिनेश प्रिंटर्स नाम से रायपुर में है । न्यू थिंक नाम से ब्लाग है ।
छत्तीसगढ़ी रचना - रक्षाबंधन
छत्तीसगढ़ी रचना (रक्षाबंधन)
देवनारायण साहू
(1) तिहार हरे पीरित अऊ मया के ,बंधना हे दो दिल के। करो सब झन सबों ला राम-राम ।।
(2) बंधन हे ता ऐ रिश्ता हे, नो हरें कोनो अईसे- वईसे। बाबु-दाई के ये हा चिरई फुल आये।
(3) सबों नोनी, बाबू के तिहार हरें, आथे साल मां एक बार जी। करथे रक्षा हर नोनी-बाबू, अपन अपन बहिनी भाई के।
(4) हावय बड़ सुग्घर ये तिहार के मान,चाहे कोई कहूं डहार रहे। बहन के खातिर आथे शहर ले, अऊ शहर ले जाथे गांव मा जी।।
(5) अईसे बंधन हे रक्षा के जो बिछुडे़, ले नई बिछुड़े सके। प्यार के बंधना नित हर बेरा,रहो हमेशा जुड़ मिल के जी।।
(6) नोनी के हांसी मा बाबू के प्रिंत के बंधना, ये लागथे तिहार सरिक जी। ऐकर ले बड़ के नई हाबे,प्यार के मिशाल जी।।
(7) सुंदर, सुग्घर, मया के बंधन, करबे झन कोनो ला नाराज़। नहीते जईसे रस्सी मा गांठ पड़े मा जोड़े नई जा सके।।
(8) ईश्वर के आशिर्वाद हरे हर नोनी-बाबू हा, येला मत रिशावन देवव जी। ये तो तुहर बगिया के दो फुल आये मोर जोड़ी दार ।।
(9) रक्षा के वचन के खातिर भाई हा वचनबद्ध हे, करही सबों के रक्षा । करबे रक्षा ता रही तोर तिर मा, नई ते चल देही छोड़ के जी ।।
(10) रक्षाबंधन तिहार प्यार अऊ दुलार के, मया के बंधना हावे जी। नोनी बाबू के हांसी ठिठोली हा, हाबे दाई बाबू के तिहार जी।।
देवनारायण साहू
Email id -sahudev72@gmail.com
मै देवनारायण साहू अपने काम काे गंभीरता से लेता हू और किसी भी काम काे लगन से करना मेरा पेशा है । हमारा एक दुकान है वह दिनेश प्रिंटर्स नाम से रायपुर में है । न्यू थिंक नाम से ब्लाग है ।
छत्तीसगढ़ी रचना (भाषा)
मै देवनारायण साहू अपने काम काे गंभीरता से लेता हू और किसी भी काम काे लगन से करना मेरा पेशा है । हमारा एक दुकान है वह दिनेश प्रिंटर्स नाम से रायपुर में है । न्यू थिंक नाम से ब्लाग है ।
(छत्तीसगढ़ी -सुन ले माेर जाेड़ीदार)
(1) रहिबाे जुर मिल के ताेर दुनाे यार, का हे विचार सुन ताे जाेड़ी दार ।
मया के बधना म बधाये हाबन, जईसे चंदा संग चादनी ।
(2) आगना मा चिरई फूल जईसे , ताेर बेनी मा गजरा के फूल।
महकत हे माेर ताेर जिवन मा फूले फूल ।
(3) आथे याद ताेर मीठ मीठ बाेली, तय गाेठियाथस सिरताेन गज़ब के जी।
लबारी नई मारत हाे , बढ़ गजब हे ताेर माेर जाेड़ी ।
(4) रखबे सुरता माेर प्रित के जाेड़ी दार, हाे जाही गऊना ताेर माेर जाेड़ी दार ।
ददा दाई के कहना ला मान, झटकुन करले बिहाव माेर जाेड़ी दार ।
(5) बनाबाे एक ठन घाेसला जेमे रही हमर प्रेम के निसानी, अऊ रखबाे आनी बानी के खिलाैना जी।
राेज गाबो चंदा के लाेरी गीत ला, अऊ ताेर माेर प्रेम गीत ला सुनाबाे वाेला जी ।
देवनारायण साहू
मै देवनारायण साहू अपने काम काे गंभीरता से लेता हू और किसी भी काम काे लगन से करना मेरा पेशा है । हमारा एक दुकान है वह दिनेश प्रिंटर्स नाम से रायपुर में है । न्यू थिंक नाम से ब्लाग है ।
