(1) एक ठीन नान कुन चिटरा , आथे चुपे-चाप
झटकुन ऐती ले ओती कोन जनी काबर ।
(2) आथे हमरो दुवारी, का जनी काला खोजत,
छानी ले, रुख राई ले, पठेरा में खोजत खोजत ।
(3) मीठ मीठ अमरुद अऊ दर्मी ला खायेस तै चुहक के, छोड़ देस मोर बर फोकला ला ।
(4) आथस बिहनिया ले खोजे बर किसम-किसम के खजानी, आथे घलो तोर संगवारी।
(5) हस तै संगवारी मोर, मन ला गज़ब भाथस। तोर मोहिनी कस रंग रुप गज़ब लागथे मोला।
एक ठन चिटरा आथे मोर अंगना मा ।
(6) हावय तोर ठऊर कोन ढहार कोन जनी, तभो ले सबों
मनखे मन ला गजब भातस ।
(7) तोर देह के रचना बड़ निक लागथे, परमात्मा ह तोला
बड़ फुर्सत मं बनाये हावय जी।
(8) तोला बड़ भाथे फल्ली ह जी, ना-नुकुर नहीं करस तै
तोला जो मिलथे वोला तै खा लेथस ।
(9) तोर मुहु मां कतका सारा खाना आते जी नानकुन तोर मुहु, अऊ तोर शरीर घलो नानकुन।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें