(छत्तीसगढ़ी -सुन ले माेर जाेड़ीदार)
देवनारायण साहू(1) रहिबाे जुर मिल के ताेर दुनाे यार, का हे विचार सुन ताे जाेड़ी दार ।
मया के बधना म बधाये हाबन, जईसे चंदा संग चादनी ।
(2) आगना मा चिरई फूल जईसे , ताेर बेनी मा गजरा के फूल।
महकत हे माेर ताेर जिवन मा फूले फूल ।
(3) आथे याद ताेर मीठ मीठ बाेली, तय गाेठियाथस सिरताेन गज़ब के जी।
लबारी नई मारत हाे , बढ़ गजब हे ताेर माेर जाेड़ी ।
(4) रखबे सुरता माेर प्रित के जाेड़ी दार, हाे जाही गऊना ताेर माेर जाेड़ी दार ।
ददा दाई के कहना ला मान, झटकुन करले बिहाव माेर जाेड़ी दार ।
(5) बनाबाे एक ठन घाेसला जेमे रही हमर प्रेम के निसानी, अऊ रखबाे आनी बानी के खिलाैना जी।
राेज गाबो चंदा के लाेरी गीत ला, अऊ ताेर माेर प्रेम गीत ला सुनाबाे वाेला जी ।
देवनारायण साहू

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