छत्तीसगढ़ी रचना (भाषा)


              (रचना - छत्तीसगढ़ी भाषा)                                                        देवनारायण साहू

हावे हमर भाषा सुघर ,ऐकर ले बड़ के कोनों नई हे । महिमा है अपार, नवा युग के नवा बछर के।

हमर भाषा ला जतका जानबे,ओतका मजा आही
जतका सरल सुग्घर मोर भाखा हे,ओतका मोर पियार हे।

छत्तीसगढ़ के हे ईही निशान,भाषा हे सरल सुजान
तेकर सेती  ईहा निकले,हे महादेवी वर्मा।

हमर भाषा मां सुरज के लाली कस, चंदा घलो हे मस्त। काबर कोनो करा जान ,जब ईही में हे सब साथ।

 भाखा हे छत्तीसगढ़ी, जानथे सबो जहुरिया।
 ईला फैलाये बर, चलो करथन ईखर गोठ बात जी।

भाषा हमर अईसे ऐला जाने बर दुरहीया ले आथे,  शोध करें बर। अजब-गजब, सुन्दर हमर छ.ग. भाखा।


                                          देवनारायण साहू
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