!! काबर जोड़े मया के बंधना !! देवनारायण साहू
(1) मोर मयारु, मोर जहुरिया, काबर जोड़े मया के बंधना । तै जोड़े काबर मया के बंधना।।
(2) तोर अगोरा मा दिन हा पहागें, तोर सुरता मा रद्दा-बाट घलो भुलागे। संगवारी ला घेरी-बेरी, पुछत रहिथो तोर हालचाल।।
(3) ते मोला छोड़ के का गेस, लागिस परान छुटगें। तोरे बर मै होके तैयार, का पाउंडर,का किरीम सबों रिसागें।।
(4) मया के बंधन मा बांध के, छोड़े काबर तै तोड़े काबर मोर मया ला। फुल पतरी मन घलो पुछथे कहागे तोर संगवारी हा ।।
(5) पहाति मुधरा ले तोरेच सुरता सताथे, का करो समझ नहीं आवय। काबर जोड़े तै मया के बंधना।।
(6) तोर चहरा आंखी मा झुलय, रथस मोर मन मा। जबले मिले हस तै, अमवा के निचे बाड़ी के पीछे।।
(7) रिसागे मोर संगी साथी, अऊ, मोर जोड़ी दार हा। का बानी लगाये मोर बर, ईमान से कहात हो।।
(8) जैसे जल बिन मछली, वैसे अन्तस होथे पिरा मोरो । काबर जोड़े तै मया के बंधना.... ।।
(9) मया ला मोर तै मारे ठोकर, काबर तै बता ।
का बाबु अऊ समाज ला, डरावत हस मोला बता।।
(10) सोचे रेहेव रबो दुनो, ददा-दाई के छांव मा ।
तोड़े तै बंधना मया के, कार जोड़ेस तै मया के बंधना।।
देवनारायण साहू
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