छत्तीसगढ़ी गीत

(3)               ( छत्तीसगढ़ी - गीत )
             !! काबर जोड़े मया के बंधना !!                                                       देवनारायण साहू
(1) मोर मयारु, मोर जहुरिया, काबर जोड़े मया के बंधना । तै जोड़े काबर मया के बंधना।।

(2) तोर अगोरा मा दिन हा पहागें, तोर सुरता मा रद्दा-बाट घलो भुलागे। संगवारी ला घेरी-बेरी, पुछत रहिथो तोर हालचाल।।

(3) ते मोला छोड़ के का गेस, लागिस परान छुटगें। तोरे बर मै होके तैयार, का पाउंडर,का किरीम सबों रिसागें।।

(4) मया के बंधन मा बांध के, छोड़े काबर तै तोड़े काबर मोर मया ला। फुल पतरी मन घलो पुछथे कहागे तोर संगवारी हा ।।

(5) पहाति मुधरा ले तोरेच सुरता सताथे, का करो समझ नहीं आवय। काबर जोड़े तै मया के बंधना।।

(6) तोर चहरा आंखी मा झुलय, रथस मोर मन मा। जबले मिले हस तै, अमवा के निचे बाड़ी के पीछे।।

(7) रिसागे मोर संगी साथी, अऊ, मोर जोड़ी दार हा। का बानी लगाये मोर बर, ईमान से कहात हो।।

(8) जैसे जल बिन मछली, वैसे अन्तस होथे पिरा मोरो । काबर जोड़े तै मया के बंधना.... ।।

(9) मया ला मोर तै मारे ठोकर, काबर तै बता ।
का बाबु अऊ समाज ला, डरावत हस मोला बता।।

(10) सोचे रेहेव रबो दुनो, ददा-दाई के छांव मा ।
तोड़े तै बंधना मया के, कार जोड़ेस तै मया के बंधना।।

                                           देवनारायण साहू

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छत्तीसगढ़ी रचना - रक्षाबंधन


            छत्तीसगढ़ी रचना (रक्षाबंधन)
              
    ‌                                         देवनारायण साहू

(1) तिहार हरे पीरित अऊ मया के ,बंधना हे दो   दिल के। करो सब झन सबों ला राम-राम ।।

(2) बंधन हे ता ऐ रिश्ता हे, नो हरें कोनो अईसे- वईसे। बाबु-दाई के ये हा चिरई फुल आये।

(3) सबों नोनी, बाबू के तिहार हरें, आथे साल मां एक बार जी। करथे रक्षा हर नोनी-बाबू, अपन अपन बहिनी भाई के।

(4) हावय बड़ सुग्घर ये तिहार के मान,चाहे कोई कहूं डहार रहे। बहन के खातिर आथे शहर ले, अऊ शहर ले जाथे गांव मा जी।।

(5) अईसे बंधन हे रक्षा के जो बिछुडे़, ले नई बिछुड़े सके। प्यार के बंधना नित हर बेरा,रहो हमेशा जुड़ मिल के जी।।

(6) नोनी के हांसी मा बाबू के प्रिंत के बंधना, ये लागथे तिहार सरिक जी। ऐकर ले बड़ के नई हाबे,प्यार के मिशाल जी।।

(7) सुंदर, सुग्घर, मया के बंधन, करबे झन कोनो ला नाराज़। नहीते जईसे रस्सी मा गांठ पड़े मा जोड़े  नई जा सके।।

(8) ईश्वर के आशिर्वाद हरे हर नोनी-बाबू हा, येला मत रिशावन देवव जी। ये तो तुहर बगिया के दो फुल आये मोर जोड़ी दार ।।

(9) रक्षा के वचन के खातिर भाई हा वचनबद्ध हे, करही सबों के रक्षा । करबे रक्षा ता रही तोर तिर मा, नई ते चल देही छोड़ के जी ।।

(10) रक्षाबंधन तिहार प्यार अऊ दुलार के, मया के बंधना हावे जी। नोनी बाबू के हांसी ठिठोली हा, हाबे दाई बाबू के तिहार जी।।

‌                                           देवनारायण साहू
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छत्तीसगढ़ी रचना (भाषा)


              (रचना - छत्तीसगढ़ी भाषा)                                                        देवनारायण साहू

हावे हमर भाषा सुघर ,ऐकर ले बड़ के कोनों नई हे । महिमा है अपार, नवा युग के नवा बछर के।

हमर भाषा ला जतका जानबे,ओतका मजा आही
जतका सरल सुग्घर मोर भाखा हे,ओतका मोर पियार हे।

छत्तीसगढ़ के हे ईही निशान,भाषा हे सरल सुजान
तेकर सेती  ईहा निकले,हे महादेवी वर्मा।

हमर भाषा मां सुरज के लाली कस, चंदा घलो हे मस्त। काबर कोनो करा जान ,जब ईही में हे सब साथ।

 भाखा हे छत्तीसगढ़ी, जानथे सबो जहुरिया।
 ईला फैलाये बर, चलो करथन ईखर गोठ बात जी।

भाषा हमर अईसे ऐला जाने बर दुरहीया ले आथे,  शोध करें बर। अजब-गजब, सुन्दर हमर छ.ग. भाखा।


                                          देवनारायण साहू
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